जहरीला भोजन





एक दिन बाजार से हरी सब्जी लेकर आया था जैसे ही उन्हें धोया तो हरे रंग का रसायन उनमे से निकलने लगा एवं उसके हाथों में जलन पड़ने लगी। पता चला की उन परवलों को ज्यादा दिन हरा रखने के लिए प्रिजर्वेटिव के रूप में खतरनाक रसायन का प्रयोग किया गया था।


हम सभी जानते हैं की हमारे प्रतिदिन के उपयोग में हम खतरनाक रसायनों को अपने शरीर में अंदर डाल रहे हैं। हमारे अनाजों में खतरनाक रासायनिक पेस्टिसाइड एवं सौन्दर्य प्रसाधनों में विषैले रसायनों का प्रयोग आम हो गया है। ये खतरनाक रसायन हमारे वातावरण में घुल कर उसे विषैला बना रहें हैं। हवा जिसमें हम साँस लेते हैं, जो हम खाना खाते हैं, जो पानी हम पीते हैं और जो सौन्दर्य प्रसाधन हम त्वचा में लगाते हैं, इन सभी में विषैले रसायनों का प्रयोग हो रहा है। ये सभी धीमे जहर हैं जिनका तत्काल कोई प्रभाव नहीं होता है किन्तु आगे चल कर ये गंभीर बीमारी का कारण बनते हैं। 

एक सर्वे के अनुसार करीब 90% कैंसर का कारण भोजन एवं पर्यावरण का विषेलापन होता है। सर्वे में एक आश्चर्यजनक तथ्य सामने आया है कि मानव शरीर में करीब 300 मानव निर्मित रसायन पाये गए हैं, जोकि शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले रसायन हैं। कीटनाशकों ने लाखों लोगों को स्थाई रूप से बीमार बनाया है, जिनमें से ज्यादातर मितली (नॉसी), डायरिया, दमा, साईनस, एलर्जी, प्रतिरोधक क्षमता में कमी और मोतियाबिंद की समस्या का सामना कर रहे हैं। 

सन 1984 में मिथाइल आइसोसाइनेट नामक गैस का भोपाल में रिसाव हुआ था और अब तक इससे प्रभावित 24 हजार लोगों की मौत हो चुकी है क्योंकि उक्त गैस में फास्जीन, क्लोरोफार्म, हाइड्रोक्लोरिक एसिड जैसे तत्वों का मिश्रण था।

ये रसायन जंगली पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं एवं इसका शिकार पक्षी, हिरन, जंगली सूअर, घड़ियाल, मेंढक इत्यादि जोकि फसलों को खाते हैं एवं इनकी भोजन श्रंखला में जो भी जंतु आते हैं वो सब इन जहरीले रसायनों का शिकार होतें हैं। जहरीले रसायनो के फलस्वरूप विगत तीन वर्षों में भारत में गिद्धों की संख्या में 90 फीसदी की कमी आ गई है।

अधिकांश खाद्य उत्पादों पर लेबिल लगा होता है कि उस उत्पाद में किन-किन तत्वों का प्रयोग किया गया है लेकिन हम लापरवाही के कारण या अज्ञानतावश उस जानकारी को नहीं पढ़ते हैं। किन्तु इस को पढ़ना बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसको पढ़ने से हम किन रसायनो का उपयोग अपने खाने में कर रहे हैं एवं उन रसायनों का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसकी जानकारी रखना बहुत जरूरी है।

विषैले रसायन हमारे शरीर में कहाँ से आते हैं: 
विषैले रसायन हमारे शरीर में कई जगह से पहुँचते हैं जिनमे मुख्य स्त्रोत निम्न हैं:

1. अत्यधिक मात्रा में रासायनिक खादों के प्रयोग से ये रसायन मिटटी से रिस कर भूजल में मिल जाते हैं एवं इस जल का प्रयोग हम पीने के पानी के रूप में करते हैं।

2. कृत्रिम रूप से फलों को पकाने एवं सब्जियों को ताजा रखने के लिए दुकानदार खतरनाक रसायनों का प्रयोग करते है जो इन फलों एवं सब्जियों के साथ हमारे शरीर में पहुंचते हैं।

3. डेरी मालकों द्वारा गाय एवं भैसों से ज्यादा दूध लेने के लिए रसायनों के इंजेक्शन लगाये जाते हैं ये रसायन दूध के माध्यम से हमारे शरीर में पहुंचते हैं।

4. फसलें एवं सब्जियां मिटटी के प्रदुषण से प्रभावित होती हैं अनुपयुक्त धातुएं एवं तत्व इन सब्जियों एवं अनाज के माध्यम से हमारे शरीर में पहुँचते हैं।

5. सड़कों पर वाहनों से निकले धुओं में विभिन्न प्रकार के रसायन एवं गैस घुले रहते हैं जो साँस लेने पर हमारे शरीर में जाकर फेफड़ों एवं स्वांस नाली को प्रभावित करते हैं।

6. फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं एवं अपशिष्ट पदार्थ वातावरण की वायु एवं पानी में घुलकर हमारे शरीर में अंदर जाकर नुकसान पहुंचाते हैं।

अनाज एवं सब्जियों में इन तत्वों का सांद्रण स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक होता है। लगातार प्रदूषित अनाज एवं सब्जियों में भारी तत्वों की मात्रा अनुपात से अधिक होने से विभिन्न प्रकार के रोग जन्म लेते हैं, जिनमे तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचाने वाली बीमारियाँ, हृदय के रोग, मूत्र रोग, मस्तिष्क से सम्बंधित रोग प्रमुख हैं। विभिन्न प्रकार के तत्व एवं धातुएं जो विभिन्न तरीकों से हमारे शरीर के अंदर जाते हैं हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं का वर्गीकरण निम्नानुसार है।

1. पोषण के लिए आवश्यक तत्व: कोबाल्ट, क्रोमियम, तांबा, लोहा, मैगनीज, मोलीब्लडनम, सेलेनियम और जस्ता।

2. संभावित फायदा वाले तत्व: बोरान, सिलिकॉन निकिल, वैनेडियम।

3. तत्व जिनके बारे में शारीरिक लाभ का कोई प्रमाण नहीं है: एल्युमीनियम, एन्टीमनी, आर्सेनिक, बेरियम, बेरिलियम, कैडमियम, लेड, पारा, चांदी एवं स्ट्रॉन्शियम मुख्य हैं।

हमारे शरीर के लिए पोषक तत्व एक निश्चित मात्रा में मिलने पर ही लाभकारी होतें हैं अगर इनकी मात्रा ज्यादा हो जाती हैं तो ये विषैले तत्व की तरह व्यवहार करने लगते हैं। हमारे शरीर में जाने वाले तत्वों को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है।

A. अति महत्वपूर्ण पोषक तत्व: 
ये तत्व शरीर की मेटाबोलिक क्रियाओं एवं अंगों के व्यवस्थित संचालन के लिए अति आवश्यक होते हैं। इनमें कैल्सियम, मेगनीज, सोडियम एवं पोटेशियम प्रमुख हैं।

B. सूक्ष्म पोषक तत्व:
ये तत्व एवं धातुएं शरीर के लिए एक निश्चित मात्रा में पोषक तत्व का कार्य करतें हैं लेकिन अधिक मात्रा में होने पर अपना विषेला प्रभाव प्रदर्शित करने लगते हैं। इनमे सिलिकॉन, निकिल, बोरान एवं वैनेडियम प्रमुख हैं।

C. विषैले तत्व:
ये तत्व एवं धातुएं मानव शरीर के लिए विषेला प्रभाव उत्पन्न करती हैं। इनसे शरीर में विभिन्न प्रकार की विसंगतियां एवं कैंसर जैसे रोग उत्पन्न होते हैं। इनमें आर्सेनिक क्रोमियम, लेड, पारा प्रमुख हैं। 
 

No comments:

Post a Comment