adulterated Sweets
त्योहार पर मिठाई की मांग और मौके का फायदा उठाने की फितरत का नतीजा है
मिलावट जो सेहत पर भारी भी पड़ सकती है। मिलावट के लिए यूरिया, कास्टिक
सोडा, डिटर्जेन्ट आदि का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर के लिए अत्यंत
नुकसानदायक होते हैं। खाद्य एवं मिलावट विभाग के सूत्रों ने बताया कि
मिलावट रोकने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इस पर रोक लगाना
काफी मुश्किल है।
मांग और आपूर्ति में अंतर, मौके का फायदा उठाने की कोशिश और लालच के चलते
मिलावट का नासूर खत्म होने के बजाय बढ़ता जाता है। अखिल भारतीय
आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की आहार विशेषज्ञ अनुजा अग्रवाल कहती हैं कि
त्यौहार करीब आने के साथ साथ बाजार में सिंथेटिक दूध या दूषित मावे से बनी
मिठाइयों की बहुतायत हो जाएगी। आम नागरिक इसे आसानी से पहचान नहीं सकता कि
यह असली है या नकली।
सिंथेटिक दूध और दूषित मावे में कास्टिक सोडा और यूरिया मिला होता है।
यूरिया एक कीटनाशक है। जब इसके इस्तेमाल से कीट मर जाते हैं तो सोचिए कि
मानव शरीर पर इसका कैसा दुष्प्रभाव होता होगा। आहार विशेषज्ञ कामिनी बाली
ने कहा कि मिठाइयां आकर्षक नजर आएं, इसके लिए तरह तरह के रंगों से उन्हें
सजाया जाता है। जरूरी नहीं हैं कि वे रंग अच्छे और हानिरहित हों। सस्ते
रंगों से तो शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव ही पड़ेगा। मिष्ठान पकाने के लिए
इस्तेमाल किए जाने वाला तेल भी यदि घटिया किस्म का हो तो वह भी हानिकारक ही
होता है।
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