मिलावट की मंडी के काले कारनामे

मिलावट की मंडी के नाम से मशहूर जैनपुर, जसड़ के अलावा क्षेत्र के कई गांवों में मिलावटी व सिंथेटिक मिठाईयां बनाने के काले कारोबारियों की एक और काली करतूत का खुलाया हुआ है। काले का कारनामे करने वाले ये दंबग मिठाईयां के सौदागर लाईसेंस की आड में अफसरों की आंखों में धूल झोंककर मिलावट का खेल करते हैं। यहीं नही इनकी होती है सैंपलिंग से लेकर माल आने.जाने तक की अफसरों से सेटिेंग। सैंपलिंग के भी होते हैं रेट फिक्स। अखबारों की सुर्खियां बनने पर भी अफसर हुए अंधे।
मिलावट की मंडी के नाम से मशूहर हो चले जैनपुरएजसड़ व डाहरएगोटका गांवों में मिलावट के इन बड़े सौॅदागरों के कारनामें भी बड़े हैं जहां चंद दिनों में वे फैक्ट्री से लेकर कोठियों तक के मालिक बन बैठे वहीं सैंकड़ों बीघा जमीन भी खरीद ली। इस काले कारोबार की जड़ें कितनी मजबूत हैं इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खद्य विभाग से जारी लाईसेंस में साफ लिखा होता है कि दूध छेने व चीन से निर्मित मिठाईयां और दूध व छेने से बना रसगुल्ला ही बना सकते हैं। लेकिन इसी लाईसेंस की आड़ में ना जाने क्या.क्या बन रहा है और क्या.क्या मिलाया जा रहा है। लेकिन सब सेटिंग का खेल है। इस बारे में एक कारोबारी बताता है कि दरअसल रसगुल्ले बनाने में हम लोग स्टार्च पाउडर दूध पाउडऱ स अरारोट का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से खतरनात अरारोट फुलाने का तो स्टार्च चमक व सफेदी लाने का काम करता है।
दूध के छेने के बजाए घटिया किस्म के दूध पाउडर का खुलकर इस्तेमाल होता है। जबकि मिल्क केक में दूध की क्रीम निकालने के बाद से बेच दिया जाता है और बचने वाले पानी को दूध के कुछ अंश में मिलाकर उसमें सूख दूध पाउडऱ मिलाकर उसमें घटिया किस्म का रिफाइंड़एखतरनाक साटरी का पानी दाना डालने के लिये मिलाया जाता है। इसके अलावा सोहनपापडी में जमकर मैदा व सूजी का इस्तेमाल करने के साथ उसे चीड़ा बनाने के लिये उसमें सेफोलाइट पपड़ी व खतरनाक कैमिकल डाले जाते हैं। यहां पेठे को मीठा बनाने के लिये खतरनाक सेक्रिन भी मिलाई जाती है। बर्फी बनाने के लिये सूख पाउडर रिफाइंड़ हाईड़ोएडालडा घी मिलाया जाता है। ये सबे खतरनाक और प्रतिबंधित कैमिकल हैं। इसके अलावा इन काले कारोबारियों का माल यदा.कदा पकड़े जाने पर इनकी जबरदस्त सेंटिंग होती है और माल का सैंपिल भरने पर इनके खाद्य विभाग के अफसरों से रेट फिक्स होते हैं। लोकल में सैंपिल भरने पर मात्र पांच हजार में पास हो जाता है जबकि बडे स्तर पर लखनऊ या आगरा जाने पर रेट बढ़ जाते हैं और दस हजार हो जाते हैं। इनकी सेटिंग का खेल इतना जबरदस्त होता है कि छापे की सूचना खुद अधिकारी दे देते हैं
और इसके बाद फिर सब अलर्ट हो जाते हैं । काले कारोबारियों की सेटिंग ब्लॉक स्तर से लेकर जिले स्तर के हर सबंधित अधिकारी से होती है शिकायक करने पर कार्रवाई तो नही होती लेकिन इन्हें जरूर पता लग जाता है किसने शिकायत की है । इसके अलावा माल बाहर जाने पर रास्ते में पकड़े जाने पर विक्रेता की जिम्मेदारी उसे छुडाकर देने तक की होती है हालांकि खर्च क्रेता का होता है। सेटिंग के इस जबदरदस्त नेटवर्क और काले कारोबार की मजबूत जड़ें इन्हें रोज फ ल.फूला रही हैं। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई दिनों से अखबारों की सुर्खियां बनने पर भी अफसरों की आंखें शर्म से नही झुकी हैं और दीवाली पर धडल्ले से काला कारोबार जारी है। 

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