खाद्य सेफ्टी धिनियम के तहत किराना, होटल, दूध, सब्जी, मांस, अंडे, अनाज
व्यापारी, पान ठेला समेत अन्य खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदार बगैर
लायसेंस या रजिस्टे्रशन के खाद्य सामग्री का विक्रय नही कर सकेंगे, यदि वे
ऐसा वे करते हैं तो सजा के साथ-साथ जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया था
लेकिन इस दिशा में हुए कार्यों पर नजर डाली जाये तो पता चलता है कि जिनके
लिए लायसेंस अनिवार्य है ऐसे कुछेक बड़े व्यापारियों को छोड़कर किसी भी
छोटे व्यापारी जैसे ठेले वालों, सब्जी वालों ने अपना रजिस्ट्रेशन नही
करवाया है। कई दुकानदारों को तो अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी तक नही
है। यदि खाद्य एवं अपमिश्रण विभाग इस दिशा में सक्रिय प्रयास करता तो
अपेक्षित परिणाम आ सकते थे। इसके अलावा जिले कार में स्थायी रूप से खाद्य
पदार्थ बेचने वाले और स्टोर करने वाले व्यापारियों को व्यापार करते समय
परिचय पत्र धारण करना अनिवार्य किया गया था, जिसमें बाजारों में दुकान
लगाने वाले व्यापारी भी शामिल है।पर क्या मिलावट रुकी इसका जवाब न में
है देश में यह सभी कुछ हम बनाते है किसी विदेशी का इसमें
योगदान नहीं है मिलावट के प्रति हम उदासीन है कमसे काम रिटायर्ड
करमचारी तो इसमें योगदान दे सकते है
अधिकाशत: परिवार अपने खाद्य पदार्थों में पोषण तत्वों के प्रति सजग रहते हैं। प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट विटामिन तथा खनिज लवण आदि को आहार में शामिल करना आवश्यक है तथा ये सभी पोषक तत्व खाद्य सामग्री द्वारा ही प्राप्त किये जा सकते हैं। यह तभी संभव है जब बाजार में मिलने वाला खाद्य पदार्थ (दालें, अनाज, दूध, मिठाई, मसाले, तेल आदि) मिलावट रहित हों। अपमिश्रित खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता काफी कम हो जाती है क्योंकि इसमें सस्ते पदार्थ जैसे रंग इत्यादि मिला दिये जाते हैं। इन्हें मिलाने से उत्पाद तो आकर्षक दिखने लगता है जिससे बिक्री ज्यादा होती है परन्तु उनकी पोषकता प्रभावित होती है व स्वास्थ्य के लिये हानिकारक सिध्द होते हैं।सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ जैसे गेहूँ, आटा, दूध, शहद, दालें, मसाले, चाय पत्ती, मेवे, इत्यादि में इस तरह मिलावट की जाती है कि मूल खाद्य पदार्थ तथा मिलावट वाले खाद्य पदार्थ में भेद करना काफी मुश्किल हो जाता है। मिलावट युक्त आहार का उपयोग करने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा शरीर में विकार उत्पन्न होने की सम्भावना बढ़ जाती है। अपभोक्ता को आर्थिक हानि का भी सामना करना पड़ता है। खाद्य पदार्थों को उपयोग करने से पूर्व यदि मिलावट की जाँच हो जाये तो उपभोक्ता काफी हद तक स्वास्थ्य सबंधित समस्याओं से बच सकता है।शरीर के पोषण के लिये एक व्यक्ति को विभिन्न भोज्य/खाद्य पदार्थों की रोज आवश्यकता है जिसके लिए सामान्य तौर पर एक परिवार अपनी आय का लगभग 50 फीसदी भाग खाद्य पदार्थों पर खर्च करता है। अधिकाशत: परिवार अपने खाद्य पदार्थों में पोषण तत्वों के प्रति सजग रहते हैं। प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट विटामिन तथा खनिज लवण आदि को आहार में शामिल करना आवश्यक है तथा ये सभी पोषक तत्व खाद्य सामग्री द्वारा ही प्राप्त किये जा सकते हैं। यह तभी संभव है जब बाजार में मिलने वाला खाद्य पदार्थ (दालें, अनाज, दूध, मिठाई, मसाले, तेल आदि) मिलावट रहित हों। अपमिश्रित खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता काफी कम हो जाती है क्योंकि इसमें सस्ते पदार्थ जैसे रंग इत्यादि मिला दिये जाते हैं। इन्हें मिलाने से उत्पाद तो आकर्षक दिखने लगता है जिससे बिक्री ज्यादा होती है परन्तु उनकी पोषकता प्रभावित होती है व स्वास्थ्य के लिये हानिकारक सिध्द होते हैं।सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ जैसे गेहूँ, आटा, दूध, शहद, दालें, मसाले, चाय पत्ती, मेवे, इत्यादि में इस तरह मिलावट की जाती है कि मूल खाद्य पदार्थ तथा मिलावट वाले खाद्य पदार्थ में भेद करना काफी मुश्किल हो जाता है। मिलावट युक्त आहार का उपयोग करने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा शरीर में विकार उत्पन्न होने की सम्भावना बढ़ जाती है। अपभोक्ता को आर्थिक हानि का भी सामना करना पड़ता है। खाद्य पदार्थों को उपयोग करने से पूर्व यदि मिलावट की जाँच हो जाये तो उपभोक्ता काफी हद तक स्वास्थ्य सबंधित समस्याओं से बच सकता है।क्या है खाद्य अपमिश्रण ?यदि किसी भोज्य पदार्थ में कोई बाहरी तत्व मिला दिया जाए या उसमें से कोई अभिन्न तत्व निकाल लिया जाए, उसे अनुचित ढंग से संग्रहीत किया जाए या दूषित स्त्रोत से प्राप्त किया जाये तथा उसकी गुणवत्ता में कमी आ गयी हो तो उस खाद्य सामग्री या भोज्य पदार्थ को मिलावटयुक्त भोज्य पदार्थ कहा जाता है।खाद्य अपमिश्रण क्यों ?प्रत्येक व्यक्ति अपने शरीर के पोषण के लिये आहार के रूप में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ बाजार से खरीदता है। कई दुकानदार अपने स्वार्थवश लालच में आकर खाद्य पदार्थों में मिलावट कर देते हैं। जैसे - दूध में पानी मिलाकर बेचना, मसालों में गेरू रंग इत्यादि का मिलाना। इस प्रकार की मिलावट करने से उपभोक्ता को खाद्य पदार्थों में से मिलने वाले पोषक तत्व पूर्ण मात्रा में नहीं मिल पाते हैं तथा मिलावट युक्त आहार ग्रहण करने से शरीर भी विकारयुक्त हो सकता है। कभी-कभी सरंक्षण एवं संग्रह की अनुचित विधियों को अपनाने से भी भोज्य पदार्थ सही प्रकार से उपभोक्ताओं को उपलब्ध नहीं हो पाता है।अपमिश्रक (मिलावटी पदार्थ) तथा उनका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव : सामान्य रूप से भोज्य पदार्थों में मिलावट लाभ कमाने के लिये की जाती है। उपभोक्ताओं को इस बात की जानकारी जरूर होनी चाहिये कि खाद्य पदार्थों में किस प्रकार की मिलावट की जाती है। तथा इसे कैसे जाँचा जा सकता है ?खाद्य अपमिश्रण से अंधापन, लकवा तथा टयूमर जैसी खतरनाक बीमारियाँ हो सकती हैं। सामान्यत: रोजमर्रा जिन्दगी में उपभोग करने वाले खाद्य पदार्थों जैसे दूध, छांछ, शहद, हल्दी, मिर्च पाउडर, धनिया, घीं, खाद्य तेल, चाय-कॉफी, मसाले, खोया, आटा आदि में मिलावट की जा सकती है। भिन्न प्रकार की मिलावट के प्रतिकूल प्रभाव भी भिन्न होते हैं। प्रस्तुत सारणी में खाद्य पदार्थों में सभांवित मिलावटी पदार्थ तथा उनसे होने वाली बीमारियों के नाम इंगित है।पर मिलावटतो उसे कहते हैं जिसमें किसी भी पदार्थ में कुछ गंदी, बासी, सड़ी हुई या सस्ती चीज को मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ाई जाये। खाद्य पदार्थों में की गयी मिलावट खाने वाले को नुकसान पहुंचाती है।मिलावट उसे कहते हैं जिसमें किसी भी पदार्थ में कुछ गंदी, बासी, सड़ी हुई या सस्ती चीज को मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ाई जाये। खाद्य पदार्थों में की गयी मिलावट खाने वाले को नुकसान पहुंचाती है। खाद्य पदार्थ असली है या मिलावटी, इसके बारे में अधिकतर लोगों को पता ही नहीं चलता और समय की कमी, पति-पत्नी दोनों का नौकरी करना, व्यस्त जीवन शैली होने के कारण कोई भी इन पचड़ों में नहीं पड़ता। इसका खामियाजा तो सेहत खराब होने पर भुगतना पड़ता है। आइए ध्यान दें। कुछ खाद्य पदार्थों की मिलावट का जिनका पता आप घर पर कुछ ध्यान देकर लगा सकते है सुगधित चांवल के निर्माण की प्रक्रिया में कृत्रिम सुंगध डालने के लिये राईस मिलों में प्राप्रेलान ग्लायकाल नामक तरल रसायन का इस्तेमाल किया जा रहा है जो मानव शरीर के लिये नुकसान दायक है। जिसे विभिन्न ब्राण्डों के नाम पर पेंिकग कर उपभोक्ताओं को बेचा जा रहा है।गुड दालों या मसालों में कंकड़ पत्थर रेत मिटटी मिलावट आम बात हो गयी है चना अरहर की दाल में खेसारी दाल हर तरह की दाल में टेलकम पाउडर एस्बेस्ट वरक में अलमुनियम काली मिर्च में पपीते के बीज नमक में चाक मिटटी रेत , चाय पत्ती या लोह चूर्ण , सरसो के तेल में आर्जीमोन तेल बेसन में पिला रंग मेटानिल मिर्च में रोडमयीन बी दूध में पानी यूरिया वाशिंग पाऊडर रंग पेंट आम बात है घी में चर्बी मेवा में अरारोट और चीनी इसी तरह से रिफाइंड तेल में भी मिलावट आम बात है मूंग की दाल में पिला रंग मटर पर कॉपर सल्फेट का छिड़काओ गोभी को सफेद करने हेतु डी डी टी या बी एच सी का स्प्रे सब्जिओं में ऑक्सीटोसिन के टीके लगा कर उन्हें बड़ा करना , बेंगन पर वेक्स लगाना आम बात हो गयी है फलो को जल्दी पकाने में कार्बाइड दूर उपयोग जग जाहिर है मिलावट की जाँच कैसे करें खाद्य पदार्थों में मिलावट की जाँच करना बहुत ही आसान है। इसकी जाँच के सरल व घरेलू तरीके हैं जिससे कोई भी उपभोक्ता आसानी से खाद्य पदार्थों की शुध्दता की जाँच कर सकता है।मिलावट की जाँच कैसे करें खाद्य पदार्थों में मिलावट की जाँच करना बहुत ही आसान है। इसकी जाँच के सरल व घरेलू तरीके हैं जिससे कोई भी उपभोक्ता आसानी से खाद्य पदार्थों की शुध्दता की जाँच कर सकता है।नमक: नमक में वाइट स्टोन पाउडर मिला हो सकता है। इसकी जांच आप ऐसे करें। 1 चम्मच नमक 1 गिलास पानी में मिलाएं अगर मिलावट होगी तो मिलावटी पदार्थ नीचे बैठ जायेगा और पानी का रंग सफेद सफेद लगेगा। नमक सही होगा तो पानी वैसे का वैसा लगेगा और नीचे शेष कुछ भी नहीं रहेगा।लाल मिर्च: लाल मिर्च में ईट का बुरादा मिलाया जा सकता है। इसकी जांच हम पानी में लाल मिर्च पाउडर को मिलाकर कर सकते हैं। अगर उसमें मिलावट होगी तो पानी लाल हो जायेगा और बुरादा नीचे बैठ जायेगा। यदि सफ़ेद झाग बनती है तो सेलखड़ी की मिलावट है दूसरा तरीका है टेस्ट ट्यूब में 2 ग्राम लाल मिर्च का पाउडर डालें और उसमें 5 मिली एसीटोन मिलाएं। अगर तुरंत लाल रंग ट्यूब में आ जाये तो मानें उसमें मिलावट है।हल्दी: हल्दी में मटैलिक पीला रंग मिलाया जाता है। इसको परखने के लिए भी पानी में कुछ हल्दी डालें और मिलाएं। फिर कुछ मिश्रण करो अलग कर उसमें हाइड्रोक्लोरिक एसिड की कुछ बूंदें डालें। अगर हल्दी मिले पानी का रंग बैंगनी हो जाये तो समझें इसमें रंग मिलाया गया है।चीनी: चीनी में चाक पाउडर मिलाया जा सकता है। इसकी जांच के लिए दो चम्मच चीनी 1 गिलास पानी में डालें बिना हिलाए किसी स्थान पर दो-चार मिनट के लिए रख दें। अगर नीचे कुछ बैठा हुआ मिले तो समझें उसमें चाक पाउडर डाला गया है।चाय पत्ती: अन्य पत्तियों को रंग कर या यूज की हुई चाय को सुखा कर मिलाया जा सकता है। इसे जांचने के लिए सफेद पेपर पर कुछ चाय की पत्ती रखें, फिर उसे पेपर से ही रगड़ें। अगर पेपर पर रंग आ जाता है तो इसका अर्थ है उसमें पत्तियों पर रंग मिलाकर मिलाया गया है। एक गीले फिल्टर पेपर पर कुछ चाय पत्ती छिड़कने के फौरन बाद उसमें गुलाबी, लाल रंग का दाग पड़े तो समझें कि चायपत्ती में मिलावट है।चाय पत्ती की शुध्दता की जांच के लिए चीनी-मिट्टी के किसी बरतन या शीशे के प्लेट पर नींबू का रस डालकर उस पर चाय पत्ती का थोड़ा सा बुरादा डाल दें। यदि नींबू के रस का रंग नारंगी या दूसरे रंग का हो जाता है, तो इसमें मिलावट है। यदि चाय पत्ति असली है, तो हरा मिश्रित पीला रंग दिखाई देगा।कॉफी: कॉफी पाउडर में चिकोरी को मिलाया जा सकता है। इसकी परख के लिए कुछ कॉफी पाउडर को पानी के गिलास में डालें। दो मिनट में देखेंगे कि मिलावट होने पर चिकोरी नीचे बैठे जायेगी। अगर काफी में मिलावट नहीं होती तो कॉफी पानी पर तैरती मिलेगी।धनिया: धनिया पाउडर में सूखा गोबर मिलाया जाता है। इसकी जांच के लिए 1 गिलास पानी में धनिया पाउडर डालें। अगर वो तैर रहा है तो समझें गोबर मिला हुआ है। उस पानी में बदबू भी आयेगी।काली मिर्च: साबुत काली मिर्च में पपीते के सूखे बीजों को मिलाया जाता है। सकी जांच के लिए काली मिर्च के कुछ दाने अल्कोहल में मिलाएं। अगर उसमें पपीते के बीज होंगे तो वो ऊपर तैरेंगे। असली काली मिर्च भारी होने के कारण नीचे बैठ जायेगी।हींग: हींग में साबुन, पत्थर और मिट्टी मिलाई जाती है। इसको जांचने के लिए हींग को पानी में अच्छी तरह मिलाएं और रख दें। कुछ देर बाद से देखें। अगर मिट्टी, पत्थर और साबुन मिला होगा तो वो नीचे सतह पर बैठ जायेगा।शहद: शहद में पानी चीनी का घोल मिला होता है। इसको जांचने के लिए रूई के बड़े फाहे को शहद में डुबो दें, फिर उसे आग लगा दें। अगर उसमें चीनी मिली होगी तो जलते हुए कड़कड़ की आवाज आयेगी और शुध्द होगा तो रूई का फाहा पूरी तरह जल जायेगा।आइस्क्रीम: आइस्क्रीम में वाशिंग पाउडर और सैकरीन मिलाई जाती है। वाशिंग पाउडर तो मात्रा बढ़ाने के लिए और सैकरीन मिठास के लिए। इसकी जांच के लिए आइस्क्रीम पर थोड़ा सा नींबू का रस मिलाएं। अगर आग बनने लगे तो उसमें वाशिंग पाउडर मिला है। आइस्क्रीम खाने पर अधिक मीठी लगे और बाद में कड़वा स्वाद आए तो समझें उसमें मीठे की जगह सैकरीन मिला है।दूध: दूध में पानी, यूरिया, सर्फ, स्टार्च आदि मिलाए जाते हैं। दूध की गुणवत्ता हम लैक्टोमीटर के इस्तेमाल से जांच सकते हैं। यह बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाता है। पानी और पाउडर का पता लगाने के लिए अगर लैक्टोमीटर 30 यूनिट से ज्यादा डूब जाता है तो इसका अर्थ है दूध में पानी या पाउडर की मिलावट है।यूरिया के लिए टेस्ट ट्यूब में 5 मिली दूध लें। उसमें ब्रोमोथाइमेल ब्लू सल्यूशन मिलाएं और 10 मिनट के लिए छोड़ दें। अगर उसमें नीला रंग दिखाई दे तो समझें यूरिया मिला है। दूसरा तरीका है आयोडीन सल्यूशन की कुछ बूंदें दूध में डालें। अगर दूध का रंग नीला हो जाये तो समझें मिलावट है।खोवा या मावा में स्टार्च मिलाया जाता है थोड़ा सा मावा पानी में उबाले और कुछ बुँदे आयोडीन की डाले यदि नील रंग की परत बनती है तो स्टार्च की मिलावट है सांद्र नाइट्रिक एसिड मिलाकर मिश्रण को खूब हिलाएं। थोड़ी देर बाद एसिड की परत में अगर लाल-भूरे रंग की परत दिखाई दे, तो यह आर्जीमोन तेल की मौजूदगी का द्योतक है।चावल में मिलावट की जांच करने के लिए दोनों हाथों से चावल की कुछ मात्रा को रगड़ें। यदि इसमें पीला रंग होगा, तो हाथों में लग जाएगा। चावल को पानी में भिगोएं और उसमें सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की कुछ बूंदें डालें। पानी का रंग बैंगनी हो जाए, तो उसमें पीला रंग मिला हुआ है।सरसों के बीज चिकने होते हैं। आर्जीमोन के बीज की सतह खुरदरी होती है तथा ये काले रंग के होते हैं। इसलिए इस तरह का फर्क करके आसानी से दोनों बीजों को अलग-अलग किया जा सकता है।चांदी के वर्क में एल्युमिनियम की मिलावट की आसानी से जांच की जा सकती है। क्योंकि चांदी के वर्क को जलाने से वह उतने ही भार की छोटी-सी गेंद के रूप में परिणत हो जाती है, जबकि मिलावट वाली चांदी को जलाने के बाद गहरे ग्रे रंग का अवशेष बच जाता है।असली और नकली केसर की पहचान आसानी से की जा सकती है। मकई के टुकड़े को सुखाकर, इसमें चीनी मिलाकर कोलतार डाई से बनाया जाने वाला नकली केसर पानी में डालने के बाद रंग छोड़ने लगता है। असली केसर को पानी में घंटों रख देने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता।रूई के फाहे को शहद में भिगोकर उसे माचिस की तीली से जलाएं। यदि शहद में चीनी और पानी का मिश्रण है, तो रूई का फाहा नहीं जलेगा और यदि शहद शुध्द है, तो चटक की आवाज के साथ जल उठेगा।असली और नकली केसर की पहचान आसानी से की जा सकती है। मकई के टुकड़े को सुखाकर, इसमें चीनी मिलाकर कोलतार डाई से बनाया जाने वाला नकली केसर पानी में डालने के बाद रंग छोड़ने लगता है। असली केसर को पानी में घंटों रख देने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता।
अधिकाशत: परिवार अपने खाद्य पदार्थों में पोषण तत्वों के प्रति सजग रहते हैं। प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट विटामिन तथा खनिज लवण आदि को आहार में शामिल करना आवश्यक है तथा ये सभी पोषक तत्व खाद्य सामग्री द्वारा ही प्राप्त किये जा सकते हैं। यह तभी संभव है जब बाजार में मिलने वाला खाद्य पदार्थ (दालें, अनाज, दूध, मिठाई, मसाले, तेल आदि) मिलावट रहित हों। अपमिश्रित खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता काफी कम हो जाती है क्योंकि इसमें सस्ते पदार्थ जैसे रंग इत्यादि मिला दिये जाते हैं। इन्हें मिलाने से उत्पाद तो आकर्षक दिखने लगता है जिससे बिक्री ज्यादा होती है परन्तु उनकी पोषकता प्रभावित होती है व स्वास्थ्य के लिये हानिकारक सिध्द होते हैं।सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ जैसे गेहूँ, आटा, दूध, शहद, दालें, मसाले, चाय पत्ती, मेवे, इत्यादि में इस तरह मिलावट की जाती है कि मूल खाद्य पदार्थ तथा मिलावट वाले खाद्य पदार्थ में भेद करना काफी मुश्किल हो जाता है। मिलावट युक्त आहार का उपयोग करने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा शरीर में विकार उत्पन्न होने की सम्भावना बढ़ जाती है। अपभोक्ता को आर्थिक हानि का भी सामना करना पड़ता है। खाद्य पदार्थों को उपयोग करने से पूर्व यदि मिलावट की जाँच हो जाये तो उपभोक्ता काफी हद तक स्वास्थ्य सबंधित समस्याओं से बच सकता है।शरीर के पोषण के लिये एक व्यक्ति को विभिन्न भोज्य/खाद्य पदार्थों की रोज आवश्यकता है जिसके लिए सामान्य तौर पर एक परिवार अपनी आय का लगभग 50 फीसदी भाग खाद्य पदार्थों पर खर्च करता है। अधिकाशत: परिवार अपने खाद्य पदार्थों में पोषण तत्वों के प्रति सजग रहते हैं। प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट विटामिन तथा खनिज लवण आदि को आहार में शामिल करना आवश्यक है तथा ये सभी पोषक तत्व खाद्य सामग्री द्वारा ही प्राप्त किये जा सकते हैं। यह तभी संभव है जब बाजार में मिलने वाला खाद्य पदार्थ (दालें, अनाज, दूध, मिठाई, मसाले, तेल आदि) मिलावट रहित हों। अपमिश्रित खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता काफी कम हो जाती है क्योंकि इसमें सस्ते पदार्थ जैसे रंग इत्यादि मिला दिये जाते हैं। इन्हें मिलाने से उत्पाद तो आकर्षक दिखने लगता है जिससे बिक्री ज्यादा होती है परन्तु उनकी पोषकता प्रभावित होती है व स्वास्थ्य के लिये हानिकारक सिध्द होते हैं।सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ जैसे गेहूँ, आटा, दूध, शहद, दालें, मसाले, चाय पत्ती, मेवे, इत्यादि में इस तरह मिलावट की जाती है कि मूल खाद्य पदार्थ तथा मिलावट वाले खाद्य पदार्थ में भेद करना काफी मुश्किल हो जाता है। मिलावट युक्त आहार का उपयोग करने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा शरीर में विकार उत्पन्न होने की सम्भावना बढ़ जाती है। अपभोक्ता को आर्थिक हानि का भी सामना करना पड़ता है। खाद्य पदार्थों को उपयोग करने से पूर्व यदि मिलावट की जाँच हो जाये तो उपभोक्ता काफी हद तक स्वास्थ्य सबंधित समस्याओं से बच सकता है।क्या है खाद्य अपमिश्रण ?यदि किसी भोज्य पदार्थ में कोई बाहरी तत्व मिला दिया जाए या उसमें से कोई अभिन्न तत्व निकाल लिया जाए, उसे अनुचित ढंग से संग्रहीत किया जाए या दूषित स्त्रोत से प्राप्त किया जाये तथा उसकी गुणवत्ता में कमी आ गयी हो तो उस खाद्य सामग्री या भोज्य पदार्थ को मिलावटयुक्त भोज्य पदार्थ कहा जाता है।खाद्य अपमिश्रण क्यों ?प्रत्येक व्यक्ति अपने शरीर के पोषण के लिये आहार के रूप में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ बाजार से खरीदता है। कई दुकानदार अपने स्वार्थवश लालच में आकर खाद्य पदार्थों में मिलावट कर देते हैं। जैसे - दूध में पानी मिलाकर बेचना, मसालों में गेरू रंग इत्यादि का मिलाना। इस प्रकार की मिलावट करने से उपभोक्ता को खाद्य पदार्थों में से मिलने वाले पोषक तत्व पूर्ण मात्रा में नहीं मिल पाते हैं तथा मिलावट युक्त आहार ग्रहण करने से शरीर भी विकारयुक्त हो सकता है। कभी-कभी सरंक्षण एवं संग्रह की अनुचित विधियों को अपनाने से भी भोज्य पदार्थ सही प्रकार से उपभोक्ताओं को उपलब्ध नहीं हो पाता है।अपमिश्रक (मिलावटी पदार्थ) तथा उनका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव : सामान्य रूप से भोज्य पदार्थों में मिलावट लाभ कमाने के लिये की जाती है। उपभोक्ताओं को इस बात की जानकारी जरूर होनी चाहिये कि खाद्य पदार्थों में किस प्रकार की मिलावट की जाती है। तथा इसे कैसे जाँचा जा सकता है ?खाद्य अपमिश्रण से अंधापन, लकवा तथा टयूमर जैसी खतरनाक बीमारियाँ हो सकती हैं। सामान्यत: रोजमर्रा जिन्दगी में उपभोग करने वाले खाद्य पदार्थों जैसे दूध, छांछ, शहद, हल्दी, मिर्च पाउडर, धनिया, घीं, खाद्य तेल, चाय-कॉफी, मसाले, खोया, आटा आदि में मिलावट की जा सकती है। भिन्न प्रकार की मिलावट के प्रतिकूल प्रभाव भी भिन्न होते हैं। प्रस्तुत सारणी में खाद्य पदार्थों में सभांवित मिलावटी पदार्थ तथा उनसे होने वाली बीमारियों के नाम इंगित है।पर मिलावटतो उसे कहते हैं जिसमें किसी भी पदार्थ में कुछ गंदी, बासी, सड़ी हुई या सस्ती चीज को मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ाई जाये। खाद्य पदार्थों में की गयी मिलावट खाने वाले को नुकसान पहुंचाती है।मिलावट उसे कहते हैं जिसमें किसी भी पदार्थ में कुछ गंदी, बासी, सड़ी हुई या सस्ती चीज को मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ाई जाये। खाद्य पदार्थों में की गयी मिलावट खाने वाले को नुकसान पहुंचाती है। खाद्य पदार्थ असली है या मिलावटी, इसके बारे में अधिकतर लोगों को पता ही नहीं चलता और समय की कमी, पति-पत्नी दोनों का नौकरी करना, व्यस्त जीवन शैली होने के कारण कोई भी इन पचड़ों में नहीं पड़ता। इसका खामियाजा तो सेहत खराब होने पर भुगतना पड़ता है। आइए ध्यान दें। कुछ खाद्य पदार्थों की मिलावट का जिनका पता आप घर पर कुछ ध्यान देकर लगा सकते है सुगधित चांवल के निर्माण की प्रक्रिया में कृत्रिम सुंगध डालने के लिये राईस मिलों में प्राप्रेलान ग्लायकाल नामक तरल रसायन का इस्तेमाल किया जा रहा है जो मानव शरीर के लिये नुकसान दायक है। जिसे विभिन्न ब्राण्डों के नाम पर पेंिकग कर उपभोक्ताओं को बेचा जा रहा है।गुड दालों या मसालों में कंकड़ पत्थर रेत मिटटी मिलावट आम बात हो गयी है चना अरहर की दाल में खेसारी दाल हर तरह की दाल में टेलकम पाउडर एस्बेस्ट वरक में अलमुनियम काली मिर्च में पपीते के बीज नमक में चाक मिटटी रेत , चाय पत्ती या लोह चूर्ण , सरसो के तेल में आर्जीमोन तेल बेसन में पिला रंग मेटानिल मिर्च में रोडमयीन बी दूध में पानी यूरिया वाशिंग पाऊडर रंग पेंट आम बात है घी में चर्बी मेवा में अरारोट और चीनी इसी तरह से रिफाइंड तेल में भी मिलावट आम बात है मूंग की दाल में पिला रंग मटर पर कॉपर सल्फेट का छिड़काओ गोभी को सफेद करने हेतु डी डी टी या बी एच सी का स्प्रे सब्जिओं में ऑक्सीटोसिन के टीके लगा कर उन्हें बड़ा करना , बेंगन पर वेक्स लगाना आम बात हो गयी है फलो को जल्दी पकाने में कार्बाइड दूर उपयोग जग जाहिर है मिलावट की जाँच कैसे करें खाद्य पदार्थों में मिलावट की जाँच करना बहुत ही आसान है। इसकी जाँच के सरल व घरेलू तरीके हैं जिससे कोई भी उपभोक्ता आसानी से खाद्य पदार्थों की शुध्दता की जाँच कर सकता है।मिलावट की जाँच कैसे करें खाद्य पदार्थों में मिलावट की जाँच करना बहुत ही आसान है। इसकी जाँच के सरल व घरेलू तरीके हैं जिससे कोई भी उपभोक्ता आसानी से खाद्य पदार्थों की शुध्दता की जाँच कर सकता है।नमक: नमक में वाइट स्टोन पाउडर मिला हो सकता है। इसकी जांच आप ऐसे करें। 1 चम्मच नमक 1 गिलास पानी में मिलाएं अगर मिलावट होगी तो मिलावटी पदार्थ नीचे बैठ जायेगा और पानी का रंग सफेद सफेद लगेगा। नमक सही होगा तो पानी वैसे का वैसा लगेगा और नीचे शेष कुछ भी नहीं रहेगा।लाल मिर्च: लाल मिर्च में ईट का बुरादा मिलाया जा सकता है। इसकी जांच हम पानी में लाल मिर्च पाउडर को मिलाकर कर सकते हैं। अगर उसमें मिलावट होगी तो पानी लाल हो जायेगा और बुरादा नीचे बैठ जायेगा। यदि सफ़ेद झाग बनती है तो सेलखड़ी की मिलावट है दूसरा तरीका है टेस्ट ट्यूब में 2 ग्राम लाल मिर्च का पाउडर डालें और उसमें 5 मिली एसीटोन मिलाएं। अगर तुरंत लाल रंग ट्यूब में आ जाये तो मानें उसमें मिलावट है।हल्दी: हल्दी में मटैलिक पीला रंग मिलाया जाता है। इसको परखने के लिए भी पानी में कुछ हल्दी डालें और मिलाएं। फिर कुछ मिश्रण करो अलग कर उसमें हाइड्रोक्लोरिक एसिड की कुछ बूंदें डालें। अगर हल्दी मिले पानी का रंग बैंगनी हो जाये तो समझें इसमें रंग मिलाया गया है।चीनी: चीनी में चाक पाउडर मिलाया जा सकता है। इसकी जांच के लिए दो चम्मच चीनी 1 गिलास पानी में डालें बिना हिलाए किसी स्थान पर दो-चार मिनट के लिए रख दें। अगर नीचे कुछ बैठा हुआ मिले तो समझें उसमें चाक पाउडर डाला गया है।चाय पत्ती: अन्य पत्तियों को रंग कर या यूज की हुई चाय को सुखा कर मिलाया जा सकता है। इसे जांचने के लिए सफेद पेपर पर कुछ चाय की पत्ती रखें, फिर उसे पेपर से ही रगड़ें। अगर पेपर पर रंग आ जाता है तो इसका अर्थ है उसमें पत्तियों पर रंग मिलाकर मिलाया गया है। एक गीले फिल्टर पेपर पर कुछ चाय पत्ती छिड़कने के फौरन बाद उसमें गुलाबी, लाल रंग का दाग पड़े तो समझें कि चायपत्ती में मिलावट है।चाय पत्ती की शुध्दता की जांच के लिए चीनी-मिट्टी के किसी बरतन या शीशे के प्लेट पर नींबू का रस डालकर उस पर चाय पत्ती का थोड़ा सा बुरादा डाल दें। यदि नींबू के रस का रंग नारंगी या दूसरे रंग का हो जाता है, तो इसमें मिलावट है। यदि चाय पत्ति असली है, तो हरा मिश्रित पीला रंग दिखाई देगा।कॉफी: कॉफी पाउडर में चिकोरी को मिलाया जा सकता है। इसकी परख के लिए कुछ कॉफी पाउडर को पानी के गिलास में डालें। दो मिनट में देखेंगे कि मिलावट होने पर चिकोरी नीचे बैठे जायेगी। अगर काफी में मिलावट नहीं होती तो कॉफी पानी पर तैरती मिलेगी।धनिया: धनिया पाउडर में सूखा गोबर मिलाया जाता है। इसकी जांच के लिए 1 गिलास पानी में धनिया पाउडर डालें। अगर वो तैर रहा है तो समझें गोबर मिला हुआ है। उस पानी में बदबू भी आयेगी।काली मिर्च: साबुत काली मिर्च में पपीते के सूखे बीजों को मिलाया जाता है। सकी जांच के लिए काली मिर्च के कुछ दाने अल्कोहल में मिलाएं। अगर उसमें पपीते के बीज होंगे तो वो ऊपर तैरेंगे। असली काली मिर्च भारी होने के कारण नीचे बैठ जायेगी।हींग: हींग में साबुन, पत्थर और मिट्टी मिलाई जाती है। इसको जांचने के लिए हींग को पानी में अच्छी तरह मिलाएं और रख दें। कुछ देर बाद से देखें। अगर मिट्टी, पत्थर और साबुन मिला होगा तो वो नीचे सतह पर बैठ जायेगा।शहद: शहद में पानी चीनी का घोल मिला होता है। इसको जांचने के लिए रूई के बड़े फाहे को शहद में डुबो दें, फिर उसे आग लगा दें। अगर उसमें चीनी मिली होगी तो जलते हुए कड़कड़ की आवाज आयेगी और शुध्द होगा तो रूई का फाहा पूरी तरह जल जायेगा।आइस्क्रीम: आइस्क्रीम में वाशिंग पाउडर और सैकरीन मिलाई जाती है। वाशिंग पाउडर तो मात्रा बढ़ाने के लिए और सैकरीन मिठास के लिए। इसकी जांच के लिए आइस्क्रीम पर थोड़ा सा नींबू का रस मिलाएं। अगर आग बनने लगे तो उसमें वाशिंग पाउडर मिला है। आइस्क्रीम खाने पर अधिक मीठी लगे और बाद में कड़वा स्वाद आए तो समझें उसमें मीठे की जगह सैकरीन मिला है।दूध: दूध में पानी, यूरिया, सर्फ, स्टार्च आदि मिलाए जाते हैं। दूध की गुणवत्ता हम लैक्टोमीटर के इस्तेमाल से जांच सकते हैं। यह बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाता है। पानी और पाउडर का पता लगाने के लिए अगर लैक्टोमीटर 30 यूनिट से ज्यादा डूब जाता है तो इसका अर्थ है दूध में पानी या पाउडर की मिलावट है।यूरिया के लिए टेस्ट ट्यूब में 5 मिली दूध लें। उसमें ब्रोमोथाइमेल ब्लू सल्यूशन मिलाएं और 10 मिनट के लिए छोड़ दें। अगर उसमें नीला रंग दिखाई दे तो समझें यूरिया मिला है। दूसरा तरीका है आयोडीन सल्यूशन की कुछ बूंदें दूध में डालें। अगर दूध का रंग नीला हो जाये तो समझें मिलावट है।खोवा या मावा में स्टार्च मिलाया जाता है थोड़ा सा मावा पानी में उबाले और कुछ बुँदे आयोडीन की डाले यदि नील रंग की परत बनती है तो स्टार्च की मिलावट है सांद्र नाइट्रिक एसिड मिलाकर मिश्रण को खूब हिलाएं। थोड़ी देर बाद एसिड की परत में अगर लाल-भूरे रंग की परत दिखाई दे, तो यह आर्जीमोन तेल की मौजूदगी का द्योतक है।चावल में मिलावट की जांच करने के लिए दोनों हाथों से चावल की कुछ मात्रा को रगड़ें। यदि इसमें पीला रंग होगा, तो हाथों में लग जाएगा। चावल को पानी में भिगोएं और उसमें सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की कुछ बूंदें डालें। पानी का रंग बैंगनी हो जाए, तो उसमें पीला रंग मिला हुआ है।सरसों के बीज चिकने होते हैं। आर्जीमोन के बीज की सतह खुरदरी होती है तथा ये काले रंग के होते हैं। इसलिए इस तरह का फर्क करके आसानी से दोनों बीजों को अलग-अलग किया जा सकता है।चांदी के वर्क में एल्युमिनियम की मिलावट की आसानी से जांच की जा सकती है। क्योंकि चांदी के वर्क को जलाने से वह उतने ही भार की छोटी-सी गेंद के रूप में परिणत हो जाती है, जबकि मिलावट वाली चांदी को जलाने के बाद गहरे ग्रे रंग का अवशेष बच जाता है।असली और नकली केसर की पहचान आसानी से की जा सकती है। मकई के टुकड़े को सुखाकर, इसमें चीनी मिलाकर कोलतार डाई से बनाया जाने वाला नकली केसर पानी में डालने के बाद रंग छोड़ने लगता है। असली केसर को पानी में घंटों रख देने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता।रूई के फाहे को शहद में भिगोकर उसे माचिस की तीली से जलाएं। यदि शहद में चीनी और पानी का मिश्रण है, तो रूई का फाहा नहीं जलेगा और यदि शहद शुध्द है, तो चटक की आवाज के साथ जल उठेगा।असली और नकली केसर की पहचान आसानी से की जा सकती है। मकई के टुकड़े को सुखाकर, इसमें चीनी मिलाकर कोलतार डाई से बनाया जाने वाला नकली केसर पानी में डालने के बाद रंग छोड़ने लगता है। असली केसर को पानी में घंटों रख देने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता।
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